राजा के पहले मंत्री के बेटे द्वारा राजा से पूछे गए 4 बुद्धिमानी भरे प्रश्न।

आज मैं  आपके समक्ष राजा और मंत्री की एक बुद्धिमानी भरी  कहानी बताने वाला हूँ। जिसे पढ़कर आप बुद्धि के महत्व को समझ पायेंगे।इस कहानी को गौर से पढिये क्योंकि इस कहानी से आपको बहुत कुछ सीखने को मिल सकता है।

मेरे इस कहानी "बुद्धिमानी का फल"  बताने का सिर्फ एक ही मकसद है, आपको बुद्धिमानी का महत्व बताना। तो चलिए शुरू करते है।
बुद्धि का फल

बेस्ट शिक्षाप्रद कहानी:)

एक राजा था ,जिसके पास अनेको मंत्री थे। राजा उन मंत्रियों में एक मंत्री को बहुत मानते थे, उनको उस मंत्री पर पूरा भरोसा था। लेकिन यह सब देखकर  राजा के बाकी मंत्री उस मंत्री से जलते थे।

वे हमेशा यही सोचते रहते थे कि उस मंत्री को कैसे राजा के नजरो में नीचा दिखाया जाये। वे तरह -तरह के हथकंडे आजमाते रहते लेकिन मंत्री हमेशा जबाब देकर अपना बचाव कर लेते थे।

राजा के दरबार में एक अत्यंत दुष्ट मंत्री था जो चतुराई करके उस विश्वासी मंत्री की  हत्या कराने में सफल हो गया। उसने राजा को ये भी यकीन दिला दिया कि अब वही उस मंत्री की जगह को संभाल सकता है।

राजा ने उस मंत्री पर विश्वास करके उसे वे सभी काम सौप दिया जो काफी ज़िम्मेवारी और ईमानदारी वाला था। साथ ही राजा ने पहले मंत्री की पत्नी और उसके लड़के को दरबार मे बुलाकर उस दुष्ट मंत्री से कहा की इनको किसी भी चीज की तकलीफ नही होनी चाहिए।

लेकिन मंत्री अपना दुष्ट स्वभाव कहा छोड़ने वाला था । वो पुराने मंत्री का पगार भी राजकोष के खजाने से लेता था और उसे खुद ही हजम कर जाता था।

मंत्री का बेटा अब पढ़ने लायक हो गया था,उसकी माँ ने ये सोच रखा था कि कैसे भी वह उसे पढ़ाएंगी। लड़का पढ़ने  लगा, वो जितना पढ़ना चाहता था उसकी माँ ने उसे  उतना पढ़ाया।

जब उस लड़के की पढ़ाई पूरी हो गयी तो वो घर लौट आया,उसने देखा उसके घर की एक-एक ईट गायब थी। जब उसने अपनी माँ से पूछा तो माँ ने कहा -बेटा इसे बेचकर ही तो मैंने तुम्हें पढ़ाया है।

अपना उजरा हुआ घर देखकर लड़के को बहुत ही दुख हुआ। ऐसा ही एक और घटना उसने देखा जब वह अपने दोस्त के घर गया था। उसने देखा कि उसकी माँ उसके दोस्त के घर नौकरानी का काम कर रही थी।

तब उसे और भी दुख हुआ। उसने निश्चय किया कि अब वो पैसा कमायेगा और अपनी माँ के तकलीफों को दूर करेगा।यह बात उसने अपनी माँ को बताई और घर से निकल पड़ा।

जब राजा अपने राज्य में भ्रमण के लिए निकले थे तभी उसने  राजा को रोका और अपने दुःसाहस के लिए क्षमा मांगते हुये बोला की आप मेरे एक प्रश्न का जबाब दीजिये ।

राजा बोले - ठीक है पूछो।
लड़का बोला -

दुनिया में सबसे बड़ा क्या है?

राजा बोले ठीक है तुम मेरे महल पर आ जाओ मैं तुम्हे बता दूंगा। लड़का राजा के महल पर गया। अब राजा अपने दुष्ट मंत्री से ये सवाल पूछ रहे थे ताकि वो उस लड़के को बता सके। दुष्ट मंत्री बाहर आया और उस लड़के से पूछा कि बताओ भाई 'दुनिया मे सबसे बड़ा क्या है?'। लड़का बोला 4000 रुपये दो बताता हूँ।

मंत्री पैसा देते हुए बोला बताओ-
लड़का ने जबाब देते हुए कहा -बुद्धि।

दुष्ट मंत्री ने  तुरंत जाकर राजा से जबाब बताया और फिर राजा ने लड़के को बताया।

एक बार फिर लड़के ने वही घटना दोहराया और राजा से एक और सवाल पूछा बताइये की-

बुद्धि खाती क्या है?

राजा ने फिर से वैसा ही जबाब दिया , तुम महल पर आ जाना तुमको तुम्हारे सवाल का जबाब मिल जाएगा। लड़का महल पर गया। अब राजा ने मंत्री से बोला जल्दी से बताओ बुद्धि क्या खाती है? 

मंत्री पहले की तरह फिर बाहर आया और लड़के से जबाब पूछा। लड़का बोला 8000 रुपये दो तो जबाब बताऊंगा।
दुष्ट मंत्री ने फिर से पैसा दिया तो लड़के ने जबाब बताया।
बुद्धि गम खाती है।जो गम को पचा लेते है उनका बुद्धि अच्छा काम करता है।

मंत्री ने तुरंत जाकर राजा को बताया और फिर राजा ने उस लड़के को बताया।

अभी कुछ दिन ही बीते थे कि लड़के ने फिर से राजा को  रोकते हुए बोला सरकार एक सवाल और है। राजा बोले ठीक है पुछ लो। लड़का बोला-

बुद्धि करती क्या है?

राजा के पास फिर से कोई जबाब नही था उसने फिर से लड़के को राजमहल पर बुलाया। लड़का हर बार की तरह फिर से गया। अब राजा अपने दुष्ट मंत्री से पूछने लगे बताओ -"बुद्धि क्या करती है?"

मंत्री फिर से बहाना बना कर बाहर आया और लड़के से बोला जल्दी से जबाब बताओ। लड़का बोला -16000 रुपये दो तो बताता हूँ। मंत्री ने पैसा देते हुए बोला जल्दी बताओ-
लड़के ने जबाब दिया-"बुद्धि देश चलाती है"

मंत्री ने झट से जाकर राजा को बताया और राजा ने लड़के को बताया।

अब लड़के की कमाई ऐसे ही हो रही थी । उसके माँ को पैसे भी मिल रही थी जिससे वो खुश थी।तभी लड़के ने सीधा राजमहल जाने का मूड बनाया और वहाँ पहुच गया।

उसने राजा से अनुरोध किया कि बस एक ही सवाल का जबाब और चाहिये। राजा बोले ठीक है पूछ लो।लड़का बोला-

बुद्धि कहा रहती है?

राजा बोले ठीक है बाहर बैठो मैं बताता हूँ ,ये सुन लड़का बाहर चला गया। अब राजा ने फिर मंत्री से पूछा और मंत्री ने बाहर आकर उस लड़के से पूछा ।लड़का बोला -32000 रुपये लगेंगे।मंत्री ने हमेशा की तरह पैसा देकर तुरंत बताने को कहा । 
लड़का ने बताया -"बुद्धि राजमहल में रहती है।"
दुष्ट मंत्री ने जाकर राजा को बताया और उस राजा ने लड़के को बताया।

अब लड़के ने अपनी सारी सच्चाई राजा को बतायी ।उसने कहा कि वो उनके पुराने मंत्री का लड़का है जिसकी हत्या आपके तत्काल मंत्री ने कराई है।साथ मे उसने ये भी बताया कि मेरे द्वारा पूछे गये सवालो का जबाब उसने मुझसे ही पूछ कर आपको बताया है और इसके बदले उसने मुझे राजकोष से 60000 रुपये दिये है।

उसने ये भी बताया कि आज तक आपके दुष्ट मंत्री ने मेरे पिताजी का पगार राजकोष से लिया है,जबकि हमे एक रुपया तक नही मिला।

ये सब सुनकर राजा अचंभित हो गए और उन्होंने तुरंत उस दुष्ट मंत्री से पूछताछ की करवाई शुरू की।उस दुष्ट मंत्री ने मौत के डर से अपना जुर्म कबूल किया  और उसे उचित दंड मिला।

राजा अपने पुराने मंत्री के लड़के के बुद्धि से बहुत ही प्रभावित  हुए और उसे अपने मुख्य मंत्री का कार भार सौप दिया।

इस तरह लड़के ने अपने बुद्धिमानी का परिचय  देते हुये  अपने पिता का पद भी पा गया और उसने अपने पिता के दुश्मन को सबक भी सीखा दिया। 

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