अकेले पहाड़ का सीना चीरने वाले सख्स की कहानी।BEST INSPIRATIONAL STORY OF MOUNTAIN MAN DASARATH MAJHI.

आज हम
आपको एक ऐसे सख्स की कहानी बताएंगे जिन्होंने अपने दिल पर लगे चोट को गले लगाकर एक ऐसी मिशाल खरी कर दी जो सुनने में आज भी झूठा लगता है लेकिन ये सचाई हैं।

दशरथ मांझी का जन्म 1929 को गेहलौर गांव में हुआ था जो  बिहार के गया जिले में आता है।वे पैसा कमाने के उदेश्य से कम उम्र में ही घर से निकल गए थे।वे झारखंड के कोयला खदान में काम करते थे।

जब वे घर गये तो उनकी शादी फाल्गुनी देवी नाम की लड़की से हुआ। शादी के बाद वे घर पर ही रहकर खेतो में काम करके गुजारा करते थे।


दशरथ माझी के पहाड़ तोड़ने के कारण।

दशरथ मांझी के जीवन का सफर चल ही रहा था कि अचानक उनके जीवन मे एक ऐसा दुखद मोर आया जिसने उनके जीवन का मकसद ही बदल दिया।
Akele sirf chheni aur hathauri se pahar me rasta banaya

हमेशा की तरह वे खेत मे काम करने गए थे और उनकी पत्नी falguni devi उनके लिए खाना लेकर पहाड़ के रास्ते से खाना लेकर जा रही थी। तभी वो पहाड़ के पतले रास्ते से  में फसकर गिर गयी जिसके वजह से उनकी मृत्यु हो गयी।

Dashrath majhi का गांव गेहलौर ,गया सिटी से 55 km की दूरी पर था और वहाँ पर कोई मेडिकल सुविधा नही होने के वजह से फाल्गुनी देवी को तत्काल treatmement नही मिल पाया।

दशरथ माझी का ये मानना था कि यदि उनके पत्नी को तत्काल treatment मिला होता तो बच जाती। बस यही बात उनके दिल मे घर कर गयी। उन्हें ऐसा लग रहा था कि उनकी पत्नी के मौत के दो कारण है पहाड़ और रास्ते की कमी (जिसके वजह से मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध नही थी।)

दशरथ मांझी का निश्चय।

वे निश्चय कर लिए की वो उस पहाड़ का सीना चीरकर रास्ता बनाएंगे। वे अपने पूरे ताकत के साथ एक छेनी और हथौड़ी  लेकर पहाड़ में रास्ता बनाने निकल पड़े। उनके गांव के लोग उनका मजाक उड़ाते थे और उन्हें पागल भी कहते थे लेकिन ये सब देखकर वे जरा सा भी disturb नही होते, बल्कि उनका निश्चय और मजबूत होते गया।

आखिरकर उनके साहस, मजबूत निश्चय और करी मेहनत के बदौलत वे पहाड़ काटकर रास्ता बनाने में सफल हुए। उस पहाड़ को काटने में उन्हें 22 वर्ष (1960-1982) लगे। उन्होने पहाड़ में 110m (360ft)लंबा,9.1m(30ft) चौरा ,एवं 7.6m(25ft) गहरा रास्ता बनाया । जिससे गेहलौर गांव और गया सिटी की दूरी 55km से कम हो कर 15 km हो गयी। इससे गेहलौर गांव के लिए विकास के रास्ते खुल गए। उस रास्ते का नाम दशरथ मांझी मार्ग है।

द माउंटेन मैंन दशरथ मांझी।

दशरथ मांझी के इस बड़े कारनामे के बाद इनको लोग माउंटेन मैन कहने लगे।इनके जीवन पर बॉलीवुड द्वारा एक docmentry फ़िल्म 2012 में बनाई गई है । movie  का नाम The Mountain Man Dashrath Majhi hai, जो हिंदी में है।

बिहार सरकार द्वारा इन्हें 2006 में social service sector field में पद्मश्री अवार्ड के लिए चयनित किया गया था।

इनकी मृत्यु  17 अगस्त 2007 को दिल्ली AIIAMS में gall blader कैंसर के वजह से हुई।

माझी के जीवन से कुछ महत्वपूर्ण सिख।

इन्होंने ने गेहलौर के लोगो के जीवन को तो सरल बना दिया लेकिन इससे भी बड़ी  चीज ये दुनिया भर के लोगो को दिए, इनके जीवन की ऐसी कहानी जो कई पीढ़ियों तक लोगो को  अपने कठिनाइयों और असफलताओ से लड़ने की ताकत देती रहेगी।

1: इनके जीवन से हमे ये शिक्षा मिलती है कि इंसान के लिए असंभव शब्द ही गलत है, इंसान जो ठान ले वो कर सकता है।

2:जब किसी काम की प्रबल इच्छा इंसान के अंदर बैठ जाये ,तो वो उसे सफल बनाकर ही दम लेता है चाहे साधन हो या न हो।

3:दुख के समय मे भी इंसान को अपना धैर्य नही खोना चाहिए।

4: किसी भी इंसान का जीवन बदलने में सिर्फ कुछ seconds ही लगते है।

5: लोगो के नेगेटिव बातो से परेशान न होकर अपने आप को और मजबूत बनाना चाहिए।

विश्लेषण।

मैने ये कहानी आप तक इस लिए पहुचाया क्योंकि मैंने इनके जीवन से बहुत कुछ सीखा है। इनकी जीवन कहानी आपको जबतक याद रहेगी तब तक आप अपने जीवन मे निराश नही होंगे।आपको मेरा ये पोस्ट कैसा लगा, अच्छा लगे तो आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों को शेयर करे।मैन ये पोस्ट अपने रिसर्च के आधार पर लिखा है। आपको इस पोस्ट Dashrath majhi story in hindi में कुछ गलत लगे तो आप हमें बता दीजिए हम इसमें संशोधन करते रहेंगे।