5 ऐसे निर्णय  जिसे पढ़कर आप अपने लाइफ के बुरे समय में भी निर्णय लेने की क्षमता नही खोयेंगे।

हमारे लाइफ में निर्णय का बहुत ही महत्व है। जब हम निर्णय लेते है तभी कुछ अच्छा कर पाते है।हमारे अंदर जितनी भी खुबिया बनाई गई है उसका इस्तेमाल हमे करना चाहिये। अगर इन खूबियों का इस्तेमाल नही होगा तो ये अपने आप नष्ट होने लगती है। अगर आप निर्णय लेने से डरते है या फिर अपने लाइफ के निर्णय दुसरो से कराते है ,तो आपको निराश होने की जरूरत नही है।

ये  पोस्ट मैने आपके लिए ही लिखा है ताकि आप निर्णय लेना सीखें।,मेरा ये पोस्ट आपको बुरे समय मे भी निर्णय लेने और अपनी समस्या से लड़ने की ताकत देगा। तो चलिए मैं आपको ऐसे पांच निर्णय बताता हूं जिससे आप कुछ अच्छा सिख सके।

बूढ़े बाज़ के साहसिक निर्णय जो  उसके लाइफ के बुरे समय मे लेने परते है।
निर्णय लेना सीखे

वैसे तो बाज़ को पक्षियों का राजा कहा जाता है ,उसकी पहचान उसकी ऊँची उड़ान से होती है। लेकिन बाज को भी अपने लाइफ में एक बड़ी समस्या का सामना करना पड़ता है जिसे वह अपने साहसिक निर्णय से दूर कर देता है।

जब बारिश होती है तो सभी पक्षी अपने -अपने घोंसले में चले जाते है ,उस वक्त बाज बादलो के ऊपर अपनी ऊंची उड़ान में मस्त रहता है।

बाज़ का उम्र लगभग 70 वर्ष होता है । जिसमे 40 वर्ष  तक वो अपनी उड़ान में मस्त रहता है लेकिन इसके बाद वो बूढ़ा हो जाता है । उसके पंख भारी हो जाते है, चोंच लंबी हो जाती है और उसके पैर के नाखून मुर जाते है। जिससे उसका जीवन कठिन हो जाता है,अब उसको उड़ने में , खाने में और चलने में बहुत ही मुश्किलो का सामना करना पड़ता है।

अब बाज़ के पास 3 ही  विकल्प होते है-

1: अपनी ऊँची उड़ान को भूलकर उड़ना छोड़ दे।

2:एक जगह स्थायी होकर किसी तरह अपना पेट पाले।

3: दर्द  झेलकर अपने शरीर को फिर से नया बनाये और अपने जीवन में फिर से बहार लाये।

बुढ़ा बाज़ निर्णय लेता है कि उसे तीसरे यानी दर्द वाले रास्ते को चुनना है और अपने जिंदगी में फिर से ख़ुशहाली लानी है। वो पहाड़ पर चला जाता है । वहाँ जाकर वो अपने पंखों को अपनी चोंच से उखाड़ फेकता है और फिर नए पंख निकलने का इंतजार करता है।
जब नए पंख आ जाते है तो वो अपने चोंच को पत्थर में घिसकर तोर देता है  और फिर नए चोंच निकलने का इन्तेजार करता है। जब उसके नए चोंच निकल लाते है तो वो अपने पैर के नाखून को पहाड़ में घिसकर तोर देता है और उसी तरह फिर नए नाखून निकलने का इंतजार करता है।

जब उसके नए नाखून निकल जाते है तो वो  फिर से जवान हो जाता है और अपने जीवन के बाकी 30 वर्ष  आजादी से जीता है।

लेकिन ऊपर बताये गए process  को करने में उसे लगभग 150 दिन (5महीना) लग जात  है जिसमे रोज उसके शरीर से खून निकलता है  और रोज उसे दर्द झेलना पड़ता है।

हमारे तत्काल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी  द्वारा लिया गया निर्णय।

वैसे देखा जाये तो इन्होंने बहुत ही साहसिक निर्णय लिये है लेकिन  अभी मैं इनके द्वारा लिए गये एक ही निर्णय के बारे में  बताने वाला हूँ जो इन्होंने दुख की घड़ी में लिया था। उस वक्त अपना देश शोक में डूबा हुआ था, जब पुलवामा attack  हुआ था । उस दुख की घड़ी को भला कौन भूल सकता है जब हमारे देश के 40 से ज्यादा जवान पुलवामा Attack में शहीद हो गए थे।
इसके बाद  हमारे प्रधानमंत्री द्वारा हमारे सेना को खुली छूट दी गयी कि आपकी  जबाबी करवाई में जो भी करेंगे ,हम आप के साथ खड़े है। इसके बाद हमारे  वायु सेना ने अपनी बहादुरी का परिचय देते हुए 40 के बदले 400 आतंकवादियों को उनके घर मे घुस कर मारा और फिर सुरक्षित लौट आये। मुझे गर्व है अपने देश की सेना पर।

दुश्मनो ने  इस घटना को अंजाम तब दिया था जब हमारे यहाँ चुनाव का माहौल  था। उनलोगो का प्लान ये था कि भारत ऐसे नाजुक मौके पर जबाबी करवाई नही करेगा। वो ये सोच रहे थे कि कोई भी राजनैतिक पार्टी या राजनेता अपने राजनैतिक नुकसान का रिस्क तब नही ले सकता जब चुनाव के कुछ ही दिन बाकी हो।

ऐसा कई बार हुआ है जब दुश्मनो ने हमारे देश की  शांति भंग करने के लिए देश के अलग -अलग जगहों पर अटैक किया , लेकिन उन्हें उचित जबाब नही मिला। शायद वे अभी भी ऐसा ही सोच रहे थे।

लेकिन इसबार हमारे प्रधानमंत्री ने दुनिया को भारत के नए नीतियों से परिचित कराया । उन्हें ये बताया कि भारत शांति में विश्वाश रखता है लेकिन जरूरत पड़ने पर कठोर फैसले लेने और ईट का जबाब पत्थर से देना भी जानता है।

जब अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी  पर परमाणु बम गिराया था।

बात उस समय की है जब जापान ने अमेरिका पर परमाणु अटैक किया था।उस समय जापान काफी शक्तिशाली देश था। उस समय अमेरिका के राष्ट्रपति(जो पैर से विकलांग थे) के लिए बहुत ही  बड़ा और साहसिक निर्णय लेने का वक्त था।उन्होंने ये निर्णय ले भी लिया कि हम भी जापान पर परमाणु बम गिरायेंगे।लेकिन उनके वायु सेना का कहना था कि ये नामुमकिन है क्योंकि हमारे देश के विमान में इतना ही fuel स्टॉक रख सकते है जिससे हम जापान तक परमाणु बम लेकर जा सके । वापस लौटने के लिए हमारे पास fuel नही बचेंगे।

24 घंटे तक अमेरिका के राष्ट्रपति  अपने वायु सेना से इस संमस्या पर बात करते रह गये। लेकिन उनके वायु सेना का एक ही जबाब सुनकर की ये immpossible है। वे अपने wheelchair से उठकर खरे हो गए(जो पैर से विकलांग थे), और बोले बताओ अब हो सकता है कि नही? इस पर उनकी वायु सेना सोच में पर गयी और बोली हा हो सकता है।

अब अमेरिका द्वारा 11 विमान जापान भेजा गया ,विमान के पायलट से ये बोला गया कि विमान में एक्स्ट्रा fuel टैंक लगाया गया है। जापान पहुच कर अमेरिका के विमानों ने जमकर परमाणु बम गिराये।बाद में जब विमान को वापस आना था तो विमान में कोई extra fuel टैंक नही था। विमान के पायलट ये समझ गये  की उन्हें क्यों भेजा गया है।

फिर क्या था उन 11 विमान के पायलटों ने  11 बिल्डिंगों में अपने विमान को घुसाया और जापान की धज्जियां उड़ा दी।

एक महान योद्धा ने अपने सिपाहियों के साथ समुन्द्र के रास्ते  दुश्मन देश मे जाकर अपने जहाज जला देने का का आदेश दिया।

ये बहुत ही पुराने समय की बात है । जब एक महान योद्धा ने सैनिकों के साथ दुश्मन देश मे जाकर अपने जहाज को जलाने का आदेश दिया। उस योद्धा के पास सैनिको की संख्या कम थी।जहाज जल जाने के बाद ,उसने अपने सैनिकों को बुलाकर कहा कि आपलोगो ने देखा जहाज जल चुका है। मतलब अब हम यहा से तभी जिंदा लौट सकते है जब हम युद्ध मे जीतेंगे।
अन्यथा हमे मरना ही होगा।

उस महान योद्धा ने कम सेना के वावजूद भी अपने दुश्मनों पर जीत हासिल की।

शिकागो के एक व्यपारी द्वारा लिया गया निर्णय ।

ये शिकागो की एक बहुत ही पुरानी घटना है ,जब शिकागो में भयंकर अग्निकांड हुआ था। शिकागो के बहुत से व्यपारियो का स्टोर जल कर खाक हो गया था।वे सभी व्यापारी एक ब्रिज पर खरे होकर ये decide कर रहे थे कि स्टोर फिर से यही बनाया जाये   या फिर दूसरे शहर में बनाये जाए। सभी व्यापारी बोले कि हम अपना स्टोर दूसरे जगह बनाएंगे। तभी उनमे से एक व्यापारी अपने स्टोर के अवशेषों की तरफ उंगली दिखाते हुए बोला।  

दोस्तो मैं यहाँ दुनिया  का सबसे महानतम स्टोर बनाऊंगा चाहे वो हजार बार जल कर खाक हो जाय। ये महान स्टोर  आज भीवही है। जो उदाहरण है उस व्यपारी के साहसिक निर्णय का ।

निर्णय लेना

इन 5 उदाहरणों से आपने जाना कि समस्या जितनी बड़ी हो निर्णय उतने ही बड़े लेने होते है। समस्या के समय  मे ही आपके निर्णय लेने की क्षमता का पता चलता है। अपना डिसीजन दूसरे पर कभी नही थोपे। निर्णय के ऐसे बहुत ही उदाहरण है है जो लोगों ने विकट परिस्थिति में   लिए है।सफल लोगो मे निर्णय लेने की क्षमता अधिकं पाई जाती है।आपको भी निर्णय लेनी चाहिये।

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